प्रेगनेंसी में बवासीर का इलाज करने के तरीके

गर्भावस्था के समय बवासीर होना आम है और इसलिए इसे गर्भावस्था का एक बड़ा साइड-इफ़ेक्ट माना जाता है। गुदा के आस-पास की नसों में सूजन ही बवासीर कहलाता है। लेकिन, अच्छी बात यह है कि अगर गर्भावस्था के समय पाइल्स का ग्रेड सामान्य है तो इसे कुछ घरेलू उपायों की मदद से ठीक किया जा सकता है। आइये प्रेगनेंसी में पाइल्स का इलाज के लिए कुछ घरेलू  नुस्खे जानते हैं।

गर्भावस्था के दौरान पाइल्स (बवासीर) के लिए 20 प्रभावी एवं प्राकृतिक घरेलू उपचार

प्रेगनेंसी के समय बवासीर कभी भी हो सकता है। लेकिन, बहुत सी महिलाएं प्रेगनेंसी के अंतिम चरण में इसका अनुभव कर सकती हैं।

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1.सेब (apples)

सेब शरीर में कोलेस्ट्रोल लेवल को कम करता है और इसमें मौजूद फाइबर कब्ज से राहत दिलाता है। रोज एक सेब खाकर गर्भावस्था के दौरान होने वाले बवासीर से बचा जा सकता है। लेकिन, इसका सेवन करते समय यह जरूर ध्यान दें कि इसे छिलका सहित खाएं।

2. केला (banana)

गर्भवती महिलाओं के लिए केला बहुत लाभदायक होता है। यह अद्भुत फल न सिर्फ  पोटेशियम (potassium), फोलिक एसिड  (folic acid),और विटामिन बी 6 (vitamin B 6) का एक संपन्न स्रोत है, बल्कि भ्रूण तंत्रिका तंत्र (fetal nervous system) के निर्माण के लिए भी बेहद फायदेमंद है। पेक्टिन और फाइबर से भरपूर केला पाचन तंत्र को सुधारता है और आँतों को साफ़ करके कब्ज से राहत दिलाता है। गर्भावस्था में बवासीर का इलाज के लिए नियमित रूप से एक केला खाए।

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3. ब्रोकोली (Broccoli)

ब्रोकोली विटामिन और मिनरल्स (जैसे- विटामिन सी, कैल्शियम, लोहा, फोलिक एसिड और बीटा-कैरोटीन) से युक्त सब्जी है। यह एंटी-ऑक्सीडेंट और फाइबर से लबालब होती है। इसे नियमित रूप से सूप या सब्जी के तौर में खाया जाता है और गर्भावस्था के दौरान होने वाले पाइल्स से छुटकारा पाया जा सकता है। इससे कब्ज नष्ट होता है और बवासीर से लाभ मिलता है।

4. नारियल का तेल लगाएं (coconut oil)

एंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial) और एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) गुणों से संपन्न नारियल का तेल गर्भावस्था के दौरान बवासीर का इलाज करने का बहुत ही आसान उपाय है। यह बवासीर के कारण होने वाले सूजन को कम करने में मदद करता है और गर्भवती महिला के लिए बिल्कुल भी नुकसानदायक नहीं है। प्रेग्नेंट महिला इसे नियमित रूप से दिन में तीन बार प्रभावी क्षेत्र पर लगा सकती है। इसके अलावा बवासीर के दौरान नारियल का तेल और भी कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। जानने के लिए पढ़ें- बवासीर में नारियल का तेल कैसे इस्तेमाल करें

5. सिट्ज बाथ (sitz bath)

सिट्ज बाथ बवासीर का दर्द दूर करता है और सूजन कम करके बवासीर के मस्सों को सिकोड़ने का काम करता है। बाथिंग टब में गुनगुना पानी डाल लें और उसमें दो चम्मच नारियल या जैतून का तेल मिला लें। अब इस टब में गर्भवती महिला अपने गुदा को 15 से 20 मिनट तक डुबोकर रखें। इसके बाद टॉवल या हल्के कपड़े से आहिस्ता-आहिस्त गुदा क्षेत्र को सुखाएं। सुखाते समय इस बात का ध्यान रखें कि तेज से न रगड़े बल्कि, कपड़े को हल्का-हल्का स्पर्श करें। इससे गर्भवती महिला को बवासीर के दौरान होने वाली खुजली और दर्द से राहत मिलेगा। अच्छे प्रभाव के लिए इस प्रक्रिया के बाद बवासीर की क्रीम भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

6. बर्फ की सेंक

प्रेग्नेंट महिला को बवासीर होने पर बर्फ के गोले का इस्तेमाल करना चाहिए। बर्फ की सेंक से दर्द, सूजन और जलन से राहत मिलती है। एक साफ़ सूती कपड़े में बर्फ के टुकड़े को डालकर बवासीर से प्रभावित हिस्से कि सिंकाई करे। गर्भावस्था के दौरान बवासीर से तुरंत राहत पाने के लिए और दर्द, सूजनादी कम करने के लिए बर्फ की सिंकाई दिन में तीन से चार बार करें।

7.स्वीट पोटैटो (sweet potato)

शकरकंद यानी स्वीट पोटैटो अपने रेचक (laxative) गुणों की वजह से मशहूर है। इसमें फाइबर और फैट बहुत कम मात्रा में पाया जाता है इसलिए, यह गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में बवासीर के लिए एक उत्तम खाद्य भी है। इसमें पाए जाने वाले कई तरह के विटामिन्स, मिनरल्स और एमिनो एसिड सेहत को कई लाभ देते हैं। लेकिन, प्रेगनेंसी के समय इसका इस्तेमाल 100 ग्राम से अधिक नहीं करना चाहिए, अन्यथा इससे मोटापा, सूजन और शरीर में शुगर लेवल में वृद्धि जैसी समस्याएँ हो सकती है।

8. एलोवेरा जेल (aloe vera gel)

एलोवेरा जेल के सुहाने गुण बवासीर की जलन और सूजन कम करने के लिए जाने जाते हैं। प्रेगनेंसी के दौरान इनके उपयोग से महिला और पेट में पल रहे बच्चे को कोई भी परेशानी नहीं होती है। पाइल्स का इलाज के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है। लेकिन, इस दौरान गर्भवती महिला को एलोवेरा का सेवन नहीं करना चाहिए। बाकी, आप एलोवेरा को दो तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे-

  • Aloe vera में हल्का पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह से घोल दें। अब इस मिश्रण को फ्रीज में रख दें और एलोवेरा जेल से बना बर्फ लेकर बवासीर के मस्सों की सिंकाई करें। एलोवेरा के गुण और बर्फ बवासीर के मस्से की जलन और सूजन कम करेंगे।
  • एलोवेरा जेल को प्रभावित क्षेत्र में लगाकर उँगलियों से 10 मिनट तक हल्की मालिश कर सकते हैं। इसके बाद ठंडे पानी से गुदा को साफ़ कर लें और कोमल एवं सूती कपड़े की मदद से प्रभावित हिस्से को सुखा लें।

आप अपने घर के एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपके घर में एलोवेरा नहीं है तो बाजार से एलोवेरा जेल खरीद सकते हैं। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि वह शुद्ध हो और उसमें कोई भी केमिकल न मिला हो।

पढ़ें- बवासीर के लिए एलोवेरा कैसे इस्तेमाल करें

9. नाशपाती खाए (pears)

डॉक्टर गर्भवती महिला को नाशपाती खाने की सलाह देते हैं क्योंकि, इसमें कई तरह के विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं जो भ्रूण विकास के लिए जरूरी होते हैं। क्या आपको पता है कि अगर आप गर्भावस्था के दौरान नाशपाती का सेवन करती हैं तो इससे कब्ज नहीं होता है और बवासीर से बचा जा सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान नाशपाती खाने से न सिर्फ बवासीर से राहत मिलती है बल्कि, इससे महिला के हर अंग का सूजन कम होता है और उच्च रक्तचाप से राहत मिलती है। गर्भवती महिला नियमित रूप से एक या आधा नाशपाती खा सकती है।

10. संतरा (orange)

साइट्रस फ्रूट (citrus fruit) में विटामिन सी कूट-कूट कर भरा होता है जो त्वचा को पुनर्जीवित करने में मदद करता है। इसके अलावा इनमें फाइबर की अधिक मात्रा पाई जाती है, फाइबर कब्ज कम करता है और और पाइल्स के कारण होने वाले कष्टों को कम करता है। संतरा ही नहीं और भी कई साइट्रस फ्रूट हैं जो इन विशेषताओं से भरपूर होते हैं। अगर आप नियमित रूप से एक संतरा खाते हैं तो गर्भावस्था के दौरान बवासीर से बचा जा सकता है और शुगर लेवल भी कम किया जा सकता है।

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11. आलू का पैक (Potato pack)

गर्भावस्था में बवासीर के चलते होने वाली जलन और सूजन को दूर करने के लिए आलू का पैक बहुत ही फायदेमंद होता है। बवासीर के लिए आलू का पैक बनाने के लिए आलू को छीलकर उसका पेस्ट बना लें और उसमें नींबू का रस निचोड़ लें। अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से छान लें और निकले हुए रस में एक कॉटन के कपड़े को डुबो लें। इस कपड़े से बवासीर के मस्सों की सिंकाई करें। इससे दर्द दूर होगा और प्रेगनेंसी की बवासीर का इलाज भी हो सकेगा।

12. काला जीरा (black curmin)

काला जीरा प्रेगनेंसी के दौरान पाइल्स के लक्षणों को काफी हद तक ख़त्म कर सकता है। इसमें पाया जाने वाला थाइमोक्विनोन (thymoquinon) एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से युक्त होता है। एक मुट्ठी काला जीरा को कूटकर उसमें कुछ मात्रा में पानी मिलाए और एक पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को गुदा क्षेत्र में लगाकर पन्द्रह मिनट के लिए छोड़ दें। पन्द्रह मिनट बाद एकदम ठंडा पानी से इसे धो दें और सॉफ्ट कपड़े से पानी को सुखा दें। अगर बवासीर के लक्षणों को कम करना है या इलाज करना है तो इस उपाय को नियमित रूप से दिन में दो बार उपयोग करें।

13. लहसुन इस्तेमाल करें (garlics)

लहसुन कई तरह के चिकित्सीय और औपचारिक गुणों से समृद्धि है। लहसुन में मौजूद एलीसिन (alicine), माइक्रोआर्गेनिज्म द्वारा उत्पन्न संक्रमणों से लड़ाई करता है। प्रेगनेंसी में लहसुन का इस्तेमाल करने के लिए एक गिलास पानी में 4 से 5 कुचली हुई लहसुन डालकर पानी को अच्छी तरह से उबालें। अब इस पानी से बवासीर से प्रभावित क्षेत्र को दिन में तीन से चार बार साफ़ करें। इससे मस्से मुरझाने लगेंगे और दर्द भी कम होगा।

14. फाइबर शामिल करें

पाचन तंत्र को दुरुस्त रखकर पूरे शरीर का स्वस्थ संचालन करने के लिए फाइबर अप्रत्यक्ष रूप से बहुत फायदेमंद है। अगर आप कम मात्रा में फाइबर का सेवन करेंगी तो इससे कब्ज होगा और बवासीर का खतरा बढ़ता चला जाएगा। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान अपने आहार में फाइबर की भरपूर मात्रा शामिल करें। हरी सब्जियाँ, साइट्रस फ्रूट, चोकरयुक्त रोटी, छिलका युक्त कई प्रकार के फल आदि फाइबर के अच्छे स्त्रोत हैं।

15. आहार में प्रोबायोटिक शामिल करें (probiotics)

प्रोबायोटिक के सेवन से शरीर को बवासीर से लड़ने में मदद मिलती है। इसके सेवन से पेट में अच्छे बैक्टीरिया का निर्माण होता है जो खाना पचाने में मदद करते हैं और आँतों की सफाई करते हैं, जिससे कब्ज कि शिकायत नहीं होती है। गर्भावस्था के दौरान आप दही, किम्ची, किण्वित पनीर (fermentated cheese) आदि का सेवन करके प्रोबायोटिक का लाभ उठा सकते हैं।

16. तले-भुने पदार्थों का सेवन न करें

गर्भावस्था हो या सामान्य अवस्था हो, बवासीर होने की सबसे बड़ी जड़ खान-पान उचित न होना है। पुराने जमाने में बवासीर किसी-स्किसी में पाया जाता था। लेकिन, अब यह कई लोगों में पाया जाता है। कारण साफ़ है, युवा पीढ़ी द्वारा खान-पान में की जाने वाली गड़बड़ी ही इस दर्द युक्त रोग के लिए जिम्मेदार है। इसलिए, आप तैलीय और मिर्च मसाले वाले पदार्थों का सेवन बिल्कुल भी न करें। इससे आपका पाचन बेकार होगा और कब्ज होगा, जिससे बवासीर का खतरा और अधिक हो जाएगा। इसके साथ पाचन में गड़बड़ी होने के कारण आपका पाचन तंत्र जरूरी आहार को भी नहीं पचा सकेगा जिससे शिशु के विकास में अड़चन होगी।

17. व्यायाम करें

बहुत सी महिलाओं का वजन पहले से ही ज्यादा होता है वहीं, गर्भावस्था के दौरान वजन में वृद्धि होने के कारण बवासीर जकड़ लेता है। वजन कम करने के लिए आप अपने खान-पान में जरूरी पोषक तत्वों को मत हटाइये बल्कि, आप कुछ सरल व्यायाम कर सकती हैं। ये व्यायाम वजन कम करेंगे और गर्भावस्था के कारण होने वाले बवासीर से बचाएँगे। इसके अलावा व्यायाम करने से कई बार महिला आसानी से नार्मल डिलीवरी से बच्चे को जन्म दे सकती है।

18. भरपूर मात्रा में पानी पिएं

गर्भावस्था के दौरान कब्ज होना और मूड फ्रेश न होने की एक वजह शरीर में पानी कि कमी भी हो सकती है। कब्ज की वजह से बवासीर और दर्दनाक हो जाता है। इसलिए, कब्ज न हो और मलत्याग के दौरान मल कोमल रहे, आप दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। भरपूर मात्रा में पानी पीने से शरीर से अनावश्यक पदार्थ मूत्र के माध्यम से आसानी से निकल जाते हैं।

19. स्वच्छता बनाए रखे

गर्भावस्था में गुदा क्षेत्र के आस-पास की गई अस्वच्छता बवासीर को बढ़ावा देती है। इसलिए, मलत्याग के बाद मुलायम कपड़े से गुदा क्षेत्र को अच्छी तरह से सुखाएं। इसके साथ सूती और ढीले कपड़े पहने। इससे कसाव नहीं होगा जिससे सूजन नहीं होगा।

20. मूली इस्तेमाल करें

मूली में मौजूद तत्व सूक्ष्मजीव से लड़ने में कारगर होते हैं और बवासीर को बढ़ने से रोकते हैं। मूली को पीसकर दूध के साथ पेस्ट बना लें और बवासीर से प्रभावित क्षेत्र पर दिन में तीन बार 20 मिनट के लिए लगाएं।

निष्कर्ष- Conclusion

ज्यादातर महिलाओं को गर्भावस्था के तीसरे चरण में पाइल्स से जूझना पड़ता है। इस दौरान आप ऊपर बताए गए उपचारों की मदद से बवासीर से निजात पा सकते हैं।  इन सभी उपायों को आजमाने के साथ-साथ आप अपने खान-पान में विशेष ध्यान दें।

तैलीय और मिर्च-मसाला वाले खाद्य पदार्थ, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स आदि का सेवन भूलकर भी न करें। इससे बवासीर का खतरा बढ़ता है और शिशु के विकास में भी अड़चन पैदा होती है। वहीं, अगर गर्भावस्था के दौरान महिला थोड़ा-बहुत भी काम नहीं करती है, एक जगह बैठी रहती है, टहलने नहीं जाती है तो भी बवासीर हो सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान महिला को हल्का-फुल्का चलते रहना चाहिए।

इस दौरान अगर आप किसी भी तरह की बवासीर की दवा का सेवन करना चाहती हैं तो डॉक्टर से सलाह लें। बिना सलाह के किसी भी दवा का सेवन न करें। अन्यथा, यह गर्भपात का विषय बन सकता है।

डिस्क्लेमर: यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है| अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें|

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